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सस्ती दवाओं के लिए फ्रांस पर बनाया दबाव, वाइन पर 100% टैक्स की दी धमकी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार और स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर) की कूटनीति में एक नया आक्रामक रुख अपनाया है। अमेरिका में महंगी दवाओं की कीमतों को कम करने के लिए ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर दबाव बनाते हुए फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इस कदम ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रंप प्रशासन व्यापारिक नीतियों का उपयोग अपनी घरेलू समस्याओं को सुलझाने और भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) रणनीति के तौर पर किस हद तक कर सकता है। कीमतों में भारी अंतर और विदेशी नेताओं से बातचीत जॉर्जिया के रोम स्थित एक स्टील प्लांट में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी उपभोक्ता कुछ दवाओं के लिए दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में 13 गुना अधिक कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने विदेशी नेताओं से फोन पर बात कर अमेरिका में दवाओं की कीमतों को अन्य देशों में मिलने वाली सबसे कम कीमतों के बराबर लाने की नीति की घोषणा की। ट्रंप के अनुसार, जब उन्होंने मैक्रों को फोन करके कीमतों में बदलाव की मांग की, तो मैक्रों ने शुरुआत में यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इससे उनका बिजनेस बंद हो जाएगा। इसके जवाब में ट्रंप ने अमेरिका में बेची जाने वाली सभी फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी दी, जिसके बाद मैक्रों इस बदलाव के लिए तैयार हो गए। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने जर्मनी और स्पेन समेत अन्य देशों से भी इसी तरह की बातचीत की और उनका दावा है कि वे देश भी इस कदम के लिए सहर्ष तैयार हो गए हैं। टैरिफ रणनीति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस घटना को इस बात का सबूत बताया कि टैरिफ अभी भी बातचीत का उनका सबसे असरदार तरीका है। ‘टैरिफ’ को पूरी डिक्शनरी में अपना पसंदीदा शब्द बताते हुए ट्रंप ने कहा कि इन व्यापारिक उपायों ने अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को वापस पटरी पर ला दिया है। फिलहाल वे कुछ ट्रेड ड्यूटी लगाने के अपने अधिकार पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही, ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने पिछले 11 महीनों में 18 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के निवेश कमिटमेंट हासिल किए हैं और चुनाव के बाद से शेयर बाजार अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है। अमेरिका में दवाओं की कीमतों को अंतरराष्ट्रीय दरों के बराबर लाने की कोशिशें राजनीतिक रूप से विवादित रही हैं। फार्मास्युटिकल कंपनियों का तर्क है कि कीमतों में इस तरह की कमी से इनोवेशन (नवाचार) और ग्लोबल सप्लाई चेन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अमेरिका द्वारा घरेलू दवाओं की कीमतों को कम करने के लिए टैरिफ को हथियार बनाना वैश्विक व्यापार के नियमों में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव है। ट्रंप का यह स्पष्ट मानना है कि टैरिफ के बिना अमेरिका मुश्किल में होता, जो भविष्य में उनके व्यापारिक फैसलों और आक्रामक वार्ताओं का स्पष्ट संकेत देता है। आगे यह देखना अहम होगा कि वैश्विक फार्मा कंपनियां और यूरोपीय देश इस दबाव के बीच अपनी रणनीति कैसे तय करते हैं।
 

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